लैपरोस्कोपी सर्जरी से निःसंतान महिलाओं को मिलेगा संतान सुख

 In Pregnancy, Treatment of Laparoscopic

डा. निकिता त्रेहन

स्त्री रोग विषेशज्ञ एवं लैपरोस्कोपिक सर्जन

प्रबंध निदेषक, सनराइज अस्पताल, कालिंदी कालोनी, दिल्ली

इन दिनों करीब 25-30 फीसदी दम्पति  ऐसे हैं जो गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन ऐसा करने में असमर्थ हैं। इन दम्पतियों में 40 प्रतिषत समस्याएं पुरुश में, 40 प्रतिषत समस्याएं महिला में और 20 प्रतिषत समस्याओं का कारण अस्पश्ट बांझपन होता है। हमारे देष में गर्भ धारण की क्षमता को बढ़ाने वाली सर्जरी के बारे में लोगों में कम जागरूकता होने के कारण ये दम्पति जल्द ही आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) कराने का निर्णय ले लेते हैं।

महिला संबंधी पहलू

लेप्रोस्कोपिक और हिस्टेरोस्कोपी बांझ दंपतियों के लिए वरदान के रूप में सामने आया है। ओपन सर्जरी की तुलना में लैपरोस्कोपी सर्जरी के कई फायदे हैं-

  1. केवल एक दिन अस्पताल में रहना
  2. कम दर्द
  3. खून का कम से कम नुकसान (चाय के एक चम्मच से भी कम)
  4. कम खर्चीला
  5. न्यूनतम आसंजन निर्माण के कारण बांझ दम्पतियों के लिए अधिक महत्वपूर्ण

सभी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी मरीज के लिए और डॉक्टर के लिए कहीं अधिक बेहतर सर्जरी साबित हो रही है। आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) की तुलना में गर्भ धारण की क्षमता बढ़ाने वाली सर्जरी के लाभ यह हैं कि इस सर्जरी से प्रजनन अंगों में बुनियादी असामान्यता को ठीक कर दिया जाता है ताकि महिला किसी भी मदद के बिना स्वाभाविक रूप से गर्भ धारण कर सके। आईवीएफ न केवल अधिक महंगा है और दम्पतियों के लिए तनावपूर्ण है, बल्कि प्रत्येक गर्भावस्था के लिए इसे करने की जरूरत पड़ती है इसलिए जब प्रजनन क्षमता बढ़ाने सर्जरी से भी कोई फायदा न हो तो आईवीएफ केवल एक अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए।

बांझ दम्पतियों में ऐसी कई स्थितियां होती हैं जिसमें प्रजनन क्षमता को बढ़ाने वाली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से गर्भ धारण में मदद मिलती है।

  1. ट्यूबल केन्युलेशन – करीब 60-10 प्रतिषत मामलों में जब ट्यूबों में रुकावट होती है तो 60-70 प्रतिषत मामलों में इसे पतली तार के जरिये खोला जा सकता है। केवल स्थायी रूप से अवरुद्ध ट्यूब वाली महिलाओं को आईवीएफ के लिए जाना चाहिए
  2. इंडोमेट्रियोसिस -इसमें सैंडविच थेरेपी की जाती है जिसके तहत एक प्राथमिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से सभी असामान्यताओं को इलाज कर दिया जाता है और उसके बाद रोगी को छह महीने के लिए हार्मोन थेरेपी दी जाती है। उसके बाद एक रिलुक लैपरोस्कोपी की जाती है। ऐसे रोगियों में हमने पाया है कि इस चिकित्सा से उनमें गर्भ धारण करने की संभावना 89 प्रतिषत तक बढ़ जाती है जबकि अन्य प्रकार की चिकित्सा से दम्पतियों के गर्भ धारण करने की संभावना 10-15 प्रतिषत ही बढ़ती है।
  3. फाइब्रॉएड – लेप्रोस्कोपिक मायोमेक्टोमी (फाइब्रॉएड को हटाने) और लुआल (यूटेरिन आर्टरी लिगेषन) के बाद महिलाओं में गर्भावस्था की दर सामान्य महिला के लगभग बराबर ही हो जाती है।
  4. पीसीओडी – वैसे मामले में जहां चिकित्सा उपचार असफल हो जाती है, पीसीओडी ड्रिलिंग (अंडाशयों को बड़ा करना) गर्भावस्था की संभावना को काफी बढ़ा देता है।
  5. हिस्टेरोस्कोपी सर्जरी – गर्भाषय के अंदर की दीवार में सेप्टम की तरह संरचना, पॉलिप या फाइब्रॉएड (गर्भ के अंदर बिनाइन विकास) को हिस्टेरोस्कोपी सर्जरी के दौरान आसानी से बाहर निकाला जा सकता है।

बच्चे के नहीं होने का दर्द केवल एक औरत ही समझ सकती है। हमारे समाज में जिस महिला को बच्चा नहीं होता है उसे प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। गर्भ धारण की क्षमता को बढ़ाने वाली सर्जरी अधिक सामान्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए और आम लोगों में जागरूकता पैदा कर इसकी उपलब्धता में वृद्धि की जा सकती है।

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